भगवान शिव से जुड़े देश में अनगिनत मंदिर है. उन मंदिरों से जुड़ी अनगिनत कहानियां. लेकिन आज हम आपकों उस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसके बारे में कहा जाता है. कि यहां मुर्दे भी जी उठते हैं.

देहरादून से 125 किमी. की दूरी

अलौकिक रहस्यों से भरा ये शिव मंदिर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से करीब 125 किमी की दूरी पर है. जहां तक पहुंचने के लिए ऊंचे- नीचे पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है. सैकड़ों साल पुराना ये मंदिर अपने अंदर सैकड़ों रहस्य समाए हुए है.

ज़मीन में हर तरफ शिवलिंग

दिलचस्प बात ये, कि यहां हर ओर शिवलिंग स्थापित हैं. पुरातत्व विभाग के मुताबिक ये शिवलिंग बेहद प्राचीन हैं. ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है. शिवलिंग छठी शताब्दी में स्थापित किए गए. लेकिन अगर आध्यात्म की बात करें. तो यहां स्थापित शिवलिंग 5 हजार साल से भी ज्यादा पुराने हैं.

क्या है लाखामंडल का रहस्य ?

हम उत्तराखंड के लाखामंडल की बात कर रहे हैं. जो रहस्यो से भरा हुआ है. यहां आने वाला हर कोई अचरज से पूछ बैठता है. इतने सारे शिवलिंग कौन लाया. और इनकी स्थापना कैसे हुई होगी. ये रहस्य इंसानी समझ और सोच से परे है.

एक बात जो सबसे ज्यादा हैरान करती है. यहां मौजूद हर शिवलिंग का रंग एक- दूसरे से अलग है. दूसरा हजारों साल ज़मीन के नीचे दबे इन शिवलिंगों पर कोई खरोच तक नहीं आई.

महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास

यूं तो लाखामंडल का मतलब होता है. लाख से बना महल है. लेकिन आप जानकर हैरान हो जाएंगे. कि पहाड़ी पर कोई महल नहीं है. हालांकि कहा जाता है. कि इसी जगह पर कौरवों ने पांडवों के लिए लाख का महल बनवाया था. जिसमें पांडवों को जलाकर मारने की कोशिश की गई थी

लाखामंडल में मौजूद गुफा के बारे में कहा जाता है, कि यही वो गुफा है. जहां से पांडव बचकर बाहर आए थे. लाखामंडल में हनोल, थैना व मैंद्रथ में खुदाई के दौरान मिले पौराणिक शिवलिंग व मूर्तियां गवाह हैं कि इस क्षेत्र में पांडवों का वास रहा है.

युधिष्ठिर ने की थी शिवलिंग की स्थापना

मान्यता है, कि लाखामंडल में मौजूद लाक्षेश्वर मंदिर में शिवलिंग की स्थापना युधिष्ठिर ने की थी. मंदिर के बाहर द्वारपालों की मूर्तियां लगवाई थीं. जो कि आज भी मौजूद हैं.

यहां मृत व्यक्ति भी जी उठता है

मान्यता है कि इस मंदिर में मृत व्यक्ति भी जी उठता है. कहा जाता है मरने पर जब भी किसी व्यक्ति को यहां लाया जाता है. वो जी उठता है. इस दौरान पुजारी उसके मुंह में गंगाजल डालते हैं. जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

ग्रेफाइट से बना है शिवलिंग

लाक्षेश्वर मंदिर में बना शिवलिंग ग्रेफाइट का है. जिसमें भक्त जलाभिषेक के दौरान अपना चेहरा साफ-साफ देख सकते हैं.

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