शिव और सृष्टि एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं. लेकिन शिव का प्रारंभ और  अंत किसी को नहीं पता. कुछ वैसे ही जैसे कैलाश पर्वत पर कोई क्यों नहीं चढ़ पाया. आज भी रहस्य है. हालांकि अभी तक विज्ञान की रिसर्च और आध्यात्मिक आस्था के आधार पर कैलाश के 9 रहस्य सामने आए हैं.

1. धरती का केंद्र

धरती के दो पोल माने जाते हैं नॉर्थ पोल और साउथ पोल. दोनों के बीच-ओ- बीच हिमालय की स्थिति मानी जाती है. लेकिन शायद आपको ये नहीं पता होगा कि हिमालय का केंद्र कैलाश पर्वत है. यानि दुनिया की धुरी या दुनिया का केंद्र हिमालय है.

2. अलौकिक शक्ति का केंद्र

वैज्ञानिक कैलाश को दुनिया के एक्सिस मुंडी भी कहते हैं. इसको आसान भाषा में समझाएं तो जैसे इंसान के शरीर का केंद्र उसकी नाभि होती है वैसे दुनिया की नाभि कैलाश पर्वत है. इसका मतलब ये हुआ कि धरती के साथ- साथ आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं.

3. पिरामिडनुमा कैलाश पर्वत

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मिश्र के पिरामिड की तरह ही कैलाश पर्वत का निर्माण हुआ है. जो 100 छोटे पिरामिडों का केंद्र है. कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 दिशा बिंदुओं के समान है और एकांत स्थान पर स्थित है, जिसके आस-पास कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है.

4. रेडिएशन

आज तक कैलाश पर्वत पर कोई चढ़ नहीं सका है. चीन ने भी 2004 के बाद से इस पर्वत पर चढ़ाई को बैन कर दिया है. हालांकि कहा जाता है कि 11वीं सदी में बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर्वत की चढ़ाई की थी और लौटकर जिंदा आने वाले इकलौते शख्स थे. लेकिन उन्होंने खुद कभी नहीं माना. ऐसा माना जाता है कि कैलाश पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही लोग रेडियोएक्टिव रेडिएशन की वजह से दिशाहीन हो जाते हैं और पहाड़ पर बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है.

5. दो रहस्यमयी सरोवर

कैलाश पर सूर्य के आकार की मानसरोवर झील और चंद्रमा के आकार की राक्षस झील भी एक रहस्य है. इन झीलों को सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है. एक और रहस्य जिसके बारे में कोई नहीं जान पाया वो है दक्षिण से देखने पर बनने वाला स्वस्तिक का निशान.

6. नदियों का उद्गम स्थल

एक रहस्य जो किसी को समझ में नहीं आया कि यहीं से 4 अलग दिशाओं में 4 नदियां क्यों निकलती है. ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलज और करनाली नदिया जो धऱती को 4 भागो में बांटती हैं.इतना ही नहीं कैलाश की चारों दिशाओं में अलग-अलग जानवरों के मुंह भी दिखते हैं जिनसे नदियों निकलती हैं. पूर्व में अश्वमुख , पश्चिम में हाथी का मुंह, उत्तर में सिंह का मुंह और दक्षिण में मोर का मुख है.

7. पुण्य आत्माओं का निवास

कहा जाता है कि कैलाश पर सिर्फ पुण्यात्माएं ही निवास कर सकती हैं. कैलाश और उसके आसपास निकलने वाली रेडियोएक्टिव तरंगों से पर्वत के चारों ओर अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है. जिससे तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरुओं के साथ टेलीपैथिक संपर्क करते हैं.

8. कैलाश पर हिम मानव

स्थानीय लोगों के साथ वैज्ञानिकों का भी मानना है कि हिमालय के इस हिस्से पर यति मानव रहते हैं. दुनियाभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं.

9. डमरू और ओम की आवाज़

कैलाश मानसरोवर और मानसरोवर झील के पास आप ध्यान से सुनेंगे तो आपको लगातार एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो. लेकिन ध्यान से सुनने पर ये आवाज डमरू या ‘ॐ’ की ध्वनि जैसी होती है.

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