ऊपर जो तस्वीर है. आप मान सकते हैं. कि एडिट की गई है. लेकिन ऐसा नहीं है. ये कुदरत की कलाकारी है. जिन्हें जो भी देखता है. हैरान रह जाता है.

ये तस्वीरें महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के छोटे से गांव निघोज की हैं. यहां ऐसे न जाने कितनी ही चट्टाने हैं. जिन पर आपकों अजीबो-गरीब गड्ढे देखने को मिलेंगे. इन गड्ढों का रहस्य क्या है. किन कारणों से इन चट्टानों की भौगोलिक संरचना ऐसी हो गई. अब तक पर्दा उठना बाकी है. लेकिन एडवेंचर्स के शौकीन, कुछ नया देखने की चाहत रखने वालों के निघोज आकर्षण का केंद्र बन गया है.

पुणे से 80 किमी. दूर है निघोज

अहमदनगर का निघोज गांव कुदरत के करिश्मों से भरा पड़ा है. यहां तस्वीरों में चट्टानों में दिखाई दे रहे गड्ढे जितने रहस्यमयी हैं. उससे कहीं ज्यादा हैरानी तब होती है. जब आप गांव के करीब से बहने वाली कुकाड़ी नदी को देखते हैं. नदी का देखते ही सबसे पहले मन में सवाल आता है. क्या इस नदी को चट्टानों को काटकर निकाला गया है?

गड्ढो से जुड़ी धार्मिक मान्यता

चट्टानों पर खुदे गड्ढों को लेकर स्थानीय लोगों के बीच एक खास तरह की मान्यता है. स्थानीय लोग इसे मलंगा देवी से जोड़कर देखते हैं. कहा जाता है, इन गड्ढो को मलंगा देवी ने अपने स्नान के लिए बनाया था.

क्या कहते हैं भू- वैज्ञानिक ?

वैज्ञानिकों का मानना है, कि भारी बारिश के वजह से पानी इन चट्टानों पर गिरा होगा. जिससे पत्थरों में छेद हो गए. और वक्त के साथ अद्भुत गड्ढों में बदल गए. हालांकि वैज्ञानिक इसकी ठीक से पुष्टि नहीं करते. अभी भी गड्ढों के रहस्य का पता लगाने के लिए भू-वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं.

गांव में कई मंदिर हैं

मलंगा देवी के दर्शन करने और इन चट्टानों को देखने के लिए साल भर पर्यटक निघोज गांव आते रहते हैं. पर्यटकों की आवाजाही से गांव में खाने-पीने की समस्या नहीं है. कई दुकानों और होटल यहां मौजूद हैं. जिससे आपकों यहां कोई दिक्कत महसूस नहीं होगी. मलंगा देवी मंदिर के अलावा गांव में और भी कई मंदिर हैं.

कैसे पहुंचे निघोज?

जैसा की पहले ही बताया कि पुणे से निघोज गांव 80 किमी. है. आप यहां पुणे या फिर किसी दूसरे शहर से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं. अहमदनगर से भी निघोज आसानी से पहुंचा जा सकता है.

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