उत्तराखंड का आखिरी गांव माणा. चमोली जिले में स्थित माणा के बारे में कई कहानियां और मान्यताएं हैं. कहा जाता है, कि जो भी एक बार माणा गांव आता है. उसके सारे पाप धुल जाते हैं, उसे जिंदगी में फिर किसी चीज की कमी नहीं रहती. वो अमीर हो जाता है.

मान्यता

ऐसी मान्यता है, कि माणा गांव में माणिक शाह नाम का व्यापारी रहता था. जो कि भगवान शिव का भक्त था. स्थानीय लोगों के मुताबिक माणिक शाह व्यापार के लिए कहीं जा रहे थे. इस दौरान लुटेरों ने न सिर्फ उनके साथ लूट-पाट की बल्कि उनकी गर्दन काट कर हत्या कर दी. इस दौरान माणिक शाह भगवान शिव के नाम का जाप कर रहे थे. कहा जाता है, कि गर्दन कटने के बाद भी माणिक शाह का सिर भगवान शिव के नाम का जाप करता रहा.

जिस पर खुश होकर भगवान भोलेनाथ ने दर्शन दिए. सुअर सिर जोड़ कर माणिक शाह को वापस जीवन दिया, साथ ही वरदान दिया कि जो भी माणा गांव आएगा. उसकी जिंदगी से सभी कष्ट दूर जाएंगे. उसकी जिंदगी में धन धान्य की कोई कमी नहीं रहेगी. माणा गांव में आज भी भगवान भोलेनाथ के स्वरूप मणिभद्र की पूजा होती है.

तीर्थ और पर्यटन स्थल

माणा गांव की दूरी बद्रीनाथ धाम से कोई तीन किलोमीटर है. यहां महाभारत के रचयिता वेद व्यास की गुफा भी है. जो कि सरस्वती नदी के किनारे पर स्थित है.

भीम पुल

माणा गांव के पास ही भीम पुल है. कहा जाता है, इस पुल का निर्माण पांडवों में सबसे बलशाली भीम ने किया था.

बद्रीनाथ धाम

भगवान बद्रीविशाल का धाम बद्रीनाथ माणा से 3 किमी. पहले है. जिसकी स्थापत्य कला बेहद अनूठी है. ये मंदिर शीतकाल के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बंद रहता है.

तप्त कुंड

तप्त कुंड बद्रीनाथ धाम में ही है. यहां कड़ाके की ठंड में भी गर्म पानी आता है. ऐसी मान्यता है, कि यहां साक्षात अग्नि देवता का वास है.

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