दुनिया भर में श्री राम भगवान की तरह पूजे जाते हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं. जन्मभूमि अयोध्या में श्री राम को भगवान माना जाता है. रामलला कहा जाता है. लेकिन ऐसी भी है. जहां श्री राम भगवान नहीं, राजा है.

ओरछा: रामराजा सरकार की नगरी

पूरी दुनिया में सिर्फ ओरछ ही एकमात्र जगह है. जहां भगवान राम राजा के रूप में विराजमान हैं. यहां भगवान राम की प्रतिमाएं धनुष बाण के साथ मिलती है. ओरछा के प्रसिद्ध मंदिर में भी भगवान तलवार और ढाल के साथ विराजमान हैं.

रामराजा सरकार को दिया जाता गार्ड ऑफ ऑनर

पूरे देश में ओरछा ही एकमात्र जगह है. जहां भगवान का गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है. ओरछा रामराजा सरकार के अलावा किसी और को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाता. फिर चाहे वो देश का राष्ट्रपति हो, या फिर प्रधानमंत्री, या फिर कोई दूसरा विशिष्ट व्यक्ति.

कहा जाता है, प्रभु शयन आरती के बाद विश्राम के लिए अयोध्या जाते हैं. सुबह वापस ओरछा आ जाते हैं.

मान्यता

यहां मान्यता है, कि ओरछा के महाराजा मधुकर शाह जी भगवान कृष्ण के भक्त थे और महारानी भगवान राम की भक्त थी. दोनों में हमेशा इस बात को लेकर झगड़ा बना रहता था कि हमारे भगवान बड़े हैं. एक दिन महाराज ने कहा, तुम भगवान राम को ओरछा लेकर आओ तो मैं समझूंगा कि तुम्हारी भक्ति और तुम्हारे राम बड़े हैं.

जिस पर रानी कुंवर गणेश ने चुनौती स्वीकार कर ली. भगवान राम को ओरछा ले जाने के लिए अयोध्या निकल पड़ीं. जहां उन्होंने लंबे वक्त तक तपस्या की. जिससे प्रसन्न होकर भगवान ने उनको दर्शन दिए और महारानी से उनके तप करने का कारण पूछा. महारानी ने भगवान से ओरछा चलने के लिए कहा. लेकिन भगवान राम ने मना कर दिया. लेकिन रानी नहीं मानी. जिस पर भगवान ने उनके सामने तीन शर्तें रखीं.

क्या थीं तीन शर्तें ?

भगवान राम ने रानी कुंवर गणेश से कहा, कि पहली शर्त कि वो बाल रूप में पुष्य नक्षत्र में ही चलेंगे, वो भी पैदल. दूसरी शर्त थी कि वो एक बार जहां पर बैठ जाएंगे, तो फिर नहीं उठेंगे. तीसरी शर्त थी कि वो ओरछा के राजा बनेंगे और महाराजा के साथ महारानी को राजधानी छोड़नी पड़ेगी. महारानी ये सारी शर्ते मान ली.

रसोई में कैसे बना मंदिर ?

महारानी के शर्ते मानने के बाद भगवान ओरछा के लिए दिए. ओरछा पहुंचने पर रानी अपनी रसोई में पहुंची. जहां उन्होंने भगवान को बिठा दिया और अपनी सहेलियों को भगवान के दर्शन करवाए. लेकिन जब उठाने का प्रयास किया. तो भगवान नहीं उठे. तब रानी को भगवान की शर्त याद. इस पर रानी ने रसोई खाली करवा दी और वहीं पर मंदिर बनवा दिया. तभी से रामराजा सरकार रसोई से अपनी सरकार चला रहे हैं.

ओरछा का वैभवशाली चतुर्भुज मंदिर

ओरछा का चतुर्भुज मंदिर ऐतिहासिक होने के साथ स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है. मंदिर ऊंची नींव पर बना है. गर्भगृह का शिखर नागर शैली और लघु शिखर हैं. यहां बता दें कि भगवान राम की स्थापना के लिए किया गया था. लेकिन जब भगवान राम रानी के महल की रसोई से नहीं उठे. तो चतुर्भुज मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की गई.

कैसे पहुंचे ?

ओरछा के राजा राम के दर्शन के लिए देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. ओरछा सड़क मार्ग से सभी शहरों से अच्छी तरह कनेक्ट है. ओरछा जाने के लिए सबसे करीबी हवाई अड्डा झांसी है. जो कि ओरछा से 16 किमी. दूर है. ट्रेन के जरिए भी आसानी से ओरछा पहुंचा जा सकता है. देश के अलग-अलग हिस्सों से ट्रेन ओरछा आती हैं.

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