राजपूती शान और वैभवशाली इतिहास को संजोए राजस्थान बेहद खूससूरत है. यहां की लोककला, संस्कृति जितनी अदभुत है. प्राकृतिक सौंदर्य उतना विविध. जैसलमेर की पहचान थार मरुस्थल से जुड़ी है. तो उदयपुर अपनी झीलों के लिए जाना जाता है. हालांकि आज झीलों के शहर उदयपुर की नहीं, बल्कि सांभर झील की करेंगे. जिसकी खूबसूरती बेमिसाल है.

सांभर झील

आप जानकर हैरान होंगे, कि करीब 90 किमी. में फैली सांभर झील नमक के उत्पादन के लिए जानी जाती है. दिलचस्प बात ये है, कि झील में तीन नदियां आकर मिलती हैं. और इन नदियों में नमक का बिल्कुल भी उत्पादन नहीं होता. ऐसे में नदियों का पानी झील में मिलने के बाद नमक उत्पादन का स्रोत कैसे बन जाता है. अब तक रहस्य है.

विशेषज्ञों के मुताबिक नदियां अरावली की पहाड़ियों से होकर गुजरती है. जहां की मिट्टी में सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा है. जब ये पानी बहकर नदी में आता है. तो नमक के रूप में रह जाता है.

सांभर झील से जुड़ी पौराणिक मान्यता

सांभर झील से पौराणिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. कहा जाता है, कि महाभारत काल में सांभर झील का क्षेत्र असुर वृषपर्वा के साम्राज्य का हिस्सा था. असुरों के कुलगुरु शुक्राचार्य यहीं रहा करते थे. सांभर झील के पास असुरों के कुलगुरु शुक्राचार्य की बेटी के समर्पित एक मंदिर भी है.

फिल्म इंडस्ट्री की पहली पसंद

सांभर झील को कई हिंदी फिल्मों में दर्शाया गया है. दिल्ली 6, रामलीला, जोधा अकबर, वीर सरीखी कई फिल्में हैं, जिनकी शूटिंग सांभर झील के आस-पास हुई है.

कब जाएं ?

सांभर झील और इसके आस-पास के क्षेत्र घूमने के लिए सबसे अच्छा वक्त अक्टूबर से मार्च के बीच का है. इस समय यहां का मौसम काफी अच्छा रहता है. इस दौरान आप यहां नमक उत्पादन होते हुए भी देख सकते हैं. खास बात ये कि इस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी भी पहुंचते हैं. जिनका दीदार आपकी यात्रा को शानदार बना देगा

कैसे पहुंचे ?

राजस्थान की राजधानी जयपुर से सांभर झील की दूरी कोई 80 किमी. है. आप जयपुर से बस, कैब के जरिए सांभर झील तक पहुंच सकते हैं.

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