यूं तो चंपावत में स्थित गोलू देवता के मंदिर को सबसे प्राचीन माना जाता है. लेकिन नैनीताल के घोड़ाखाल में स्थित मंदिर की अपनी विशेषता है. दरअसल घोड़ाखाल में स्थित गोलू देवता के मंदिर से एक अद्भुत कहानी जुड़ी हुई है.

मंदिर को लेकर मान्यता

कहा जाता है, चंपावत की रहने वाली एक महिला ने गोलू देवता से न्याय की गुहार लगाई थी. जिस पर गोलू देवता खुद चलकर घोड़ाखाल पहुंचे और उसके साथ न्याय किया. तब से घोड़खाल में गोलू देवता की पूजा अर्चना की जाती है. कहा जाता है, कि मंदिर में जो कोई भी न्याय मांगने के लिए आता है, कभी खाली नहीं जाता.

कुमाऊं में अटूट है आस्था

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में गोलू देवता को भगवान गणेश के समकक्ष माना जाता है. यही कारण है कोई भी शुभ कार्य शुरु करने से पहले लोग गोलू देवता के मंदिर में मत्था टेकने जरूर जाते हैं.

मंदिर की नैनीताल से दूरी

गोलू देवता का प्रसिद्ध घोड़ाखाल मंदिर भवाली से 5 किमी. और नैनीताल शहर से 17 किमी. दूर है. समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर से आसपास के कई दर्शनीय स्थल दिखाई देते हैं. जिनमें भीमताल, नैनीताल की पहाड़ियां और भवाली शामिल है

पन्ने में लिखकर अर्जी टांगते हैं भक्त

यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी अर्जी एक पन्ने में लिखकर टांग देते हैं. मन्नत पूरी होने पर भगवान गोलू देवता को घंटी अर्पित करते है. मान्यता है, कि गोलू देवता के दरबार में जो भी अर्जी लगाई जाती है. वो लिखकर टांग दी जाती है. या फिर मन में बता दी जाती है. उसका जिक्र किसी से नहीं किया जाता.

कई विशिष्ट व्यक्ति लगा चुक हैं हाजिरी

गोलू देवता मंदिर में आने वाले में श्रद्धालुओं में सिर्फ आम लोग शामिल नहीं हैं. कई विशिष्ट लोग मंदिर आ चुके हैं. जिनमें नेपाल के प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन के नाम शामिल हैं.

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