उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित मां शक्ति का प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर अपने आप में विशेष है. ये अकेला मंदिर है, जहां मूर्ति पूजा का विधान नहीं है. मंदिर में न तो कोई प्रतिमा है. और न ही कोई पदचिन्ह. जिनकी पूजा की जा सके. यहां मंदिर के गर्भगृह में स्थित कुण्डी की पूजा की जाती है.

मंदिर को लेकर मान्यता

कहा जाता है, कि देवासुर संग्राम के वक्त मां शक्ति ने रक्तबीज दानव का वध करने के लिए कालीशिला में प्राकट्य रूप लिया था. और दानव के वध के बाद यहीं जमीन में समा गईं थी. शक्तिपीठ को गिरिराज पीठ के नाम से भी जाना जाता है. ये स्थान तंत्र साधना के लिए भी मशहूर है.

हरियाली देवी मंदिर

उत्तराखंड को देवभूमि ऐसे ही नहीं कहा जाता, यहां कदम पर देवी-देवताओं से जुड़े स्थल है. जिनमें हिंदू धर्म संस्कृति की अटूट आस्था है. रुद्रप्रयाग के जसोली गांव में स्थित सिद्धपीठ हरियाली देवी मंदिर समुद्र तल से 9500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. जहां हर साल हजारों की संख्यां में श्रद्धालु आते हैं.

मठियाणा देवी मंदिर

यहां मां मठियाणा देवी दो अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं. मणियाणा देवी मंदिर में मां रौद्र रूप में विराजमान है. तो मठियाणा खाल में मां सौम्य रूप में विराजमान हैं. मान्यता है, कि मां मणियामा, मां काली का ही रूप हैं.

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