यूं तो सारनाथ की पहचान बौद्ध धर्म से जुड़ी है. सारनाथ को भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली कहा जाता है. लेकिन सारनाथ में सिर्फ बौद्ध धर्म से जुड़े स्थल ही मौजूद नहीं है. यहां हिंदू और जैन धर्म से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल है. जिन्हें देखने के लिए हर साल हजारों लोग आते हैं.

वाराणसी से 10-11 किमी. दूर है सारनाथ

ऐसे में अगर आप वाराणसी आए है. तो सारनाथ घूमने जरूर जाएं. क्योंकि सारनाथ ही वो जगह है, जो भगवान बुद्ध के उपदेश को अर्थ समझाता है. जैन धर्म और हिंदू धर्म का सार बतलाता है. मौर्यकालीन इतिहास का बखान करता है. मशहूर अशोक स्तम्भ सारनाथ में ही है. यहीं पर भगवान बुद्ध ने अपना पहले उपदेश दिया था. जैन धर्म के तीर्थांकर श्री श्रेयांसनात जन्म स्थल भी सारनाथ है.

तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं, उन स्थलों की जहां आपकों जरूर जाना चाहिए.

अशोक स्तम्भ

भारतीय करेंसी पर दिखने वाली अशोक की लाट इसी स्तम्भ से ली गई है. स्तम्भ का निर्माण सम्राट अशोक ने करवाया था. स्तम्भ में चार शेर बने हुए हैं. जो कि एक दूसरे से पीठ सटाकर बैठ हैं. स्तम्भ के निचले भाग में अशोक चक्र बना हुआ है. कहा जाता है, कि तिरंगे में दिखने वाला चक्र यहीं से लिया गया है.

धमेख स्तूप

धमेख स्तूप की आकृति गोलाकार है. धमेख स्तूप बौद्ध धर्म का पवित्र स्थल है. दिलचस्प बात ये कि 143 फीट ऊंचे इस स्तूप में न कोई दरवाजा है और न ही खिड़की.

मूलगंध कुटी विहार

मूलगंध कुटी विहार भगवान बुद्ध को समर्पित मंदिर है. जिसकी वास्तुकला देखने लायक है. मंदिर का निर्माण महाबोधि सोसायटी ने करवाया था. कहा जाता है कि यहीं भगवान बुद्ध ने तपस्या के बाद पहली वर्षा देखी थी.

चौखंडी स्तूप

धमेख स्तूप की तरह ही बौद्ध धर्म में चौखंडी स्तूप का अपना ही महत्व है. कहा जाता है, कि स्तूप का निर्माण उसी जगह पर हुआ है. जहां भगवान बुद्ध पांच तपस्वियों से मिले थे. चौखंडी स्तूप धमेख स्तूप के पास ही स्थित है.

तिब्बती मन्दिर

तिब्बती मंदिर की शिल्पकला अद्भुत है. यहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा लगी है. इसके अलावा मंदिर के बाहर प्रार्थना पहिए लगे हुए हैं.

थाई मंदिर

थाई मंदिर सारनाथ का प्रमुख आकर्षण है. मंदिर की वास्तुकला ऐसी है. कि पर्यटक आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते. ये मंदिर खूबसूरत बगीचों के बीच स्थित है.

पुरातत्व संग्रहालय

सारनाथ में स्थित पुरातत्व संग्रहालय में कई ऐसे दस्तावेज, इतिहास से जुड़े साक्ष्य मौजूद हैं. जो बेहद प्राचीन हैं. इसलिए आप कभी भी सारनाथ आएं, एक बार संग्रहालय में जरूर जाएं.

इसके अलावा भी सारनाथ में कई मठ, पार्क और ऐतिहासिक स्थल है. जिनका निर्माण मौर्य काल या फिर 10वीं शताब्दी से पहले हुआ था. ये पर्यटक स्थल आज भी उस कालखंड के इतिहास को खुद में समेटे हुए हैं.

सारनाथ कैसे पहुंचे ?

देश के किसी भी हिस्से से वाराणसी रेल, सड़क और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. वाराणसी से सारनाथ की दूरी 10-10 किमी. है. लिहाजा आप पहले वाराणसी आइए. फिर यहां से कैब, बस या फिर टैक्सी के जरिए सारनाथ पहुंच सकते हैं.

बता दें कि वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट से सारनाथ की दूरी करीब 25 किमी. है. जबकि वाराणसी रेल जंक्शन से दूरी 10-11 किमी. है.

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