अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है. तो चित्रकूट धाम तपोस्थली है. चित्रकूट में ही भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास का अधिकतर समय गुजारा था.

चित्रकूट धाम में ऐसे न जाने कितने ही स्थल है. जहां भगवान राम के पदचिन्ह मिलते हैं. कामदगिरि मंदिर, सती अनसूया आश्रम, रामघाट, हनुमान धारा, भरत मिलाप मंदिर, जानकी कुंड और कई पौराणिक स्थल.

प्रयागराज हाईवे पर स्थित है आश्रम

चित्रकूट ही वो जगह है. जहां रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का धाम का आश्रम है. चित्रकूट-इलाहाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर लालापुर में महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली है. जिसे महर्षि वाल्मीकि आश्रम कहा जाता है. यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर कई विशिष्ट लोग आ चुके हैं

महर्षि वाल्मीकि ने यहीं लिखी थी रामायण

कहा जाता है, महर्षि वाल्मीकि ने यहीं रह कर रामायण की रचना की थी. जिसे बाद में अवधी में तुलसीदास रामचरितमानस के रूप में लिखा. तुलसीदास जी का जन्म स्थान राजापुर भी यहां से ज्यादा दूर नहीं है.

प्राचीनता को समेटे हुए है आश्रम

झुकेही से निकली तमसा नदी आश्रम के पास से बहती हुई सिरसर के पास यमुना में मिलती है. पूरी पहाड़ी दिव्यता के साथ प्राचीनतम इतिहास का बोध कराती है. यहीं पर चंदेनकालीन आशांबरा देवी का मंदिर है.

वाल्मीकि आश्रम कब आएं ?

आश्रम सुबह 9 बजे से शाम के 7 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. चित्रकूट बस स्टैंड से आश्रम की दूरी कोई 18 किमी. है.

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