केदारनाथ धाम से ऊपर की ओर स्थित ग्लेशियर में क्या कोई दर्शनीय स्थल है. या फिर सिर्फ बर्फ से भरी चोटियां हैं. इस बारे में जानकारी कम ही है. लेकिन अब एक नए ताल की खोज हुई है. नाम है पैंया ताल.

पर्यटकों की नजरों से अब तक ओझल रहा ये खूबसूरत ताल या दूसरे लफ्जों में कहें तो झील केदारनाथ से 16 किमी. ऊपर है. इस झील की खोज रुद्रप्रयाग के दो युवकों ने की है. हालांकि इस झील के बारे में पहले भी बाते होती रही हैं.

मेरू-सुमेरू पर्वत श्रंखला की छाया में स्थित है झील

पैंया ताल की ऊंचाई समुद्रतल से करीब 4, 135 मीटर है. ये झील शानदार हिमालयी पर्वत श्रंखलाओं के दूध गंगा घाटी में स्थित है. यहां पहुंचने के लिए पहले गौरीकुंड से केदारनाथ. फिर केदारनाथ से वासुकीताल और वासुकीताल से पैंया ताल तक पहुंचा जा सकता है. वासुकीताल से पैंयाताल की दूरी 8 किमी. है

भू- वैज्ञानिक को नहीं है जानकारी

दिलचस्प बात ये है, कि पैंयाताल की जानकारी वन जीव प्रभाग और भू- वैज्ञानिकों को भी नहीं है. पैंयाताल एक बड़े भू-भाग में फैला हुआ है. और पानी से लबालब है. यहां तक गूगल मैप में भी केदारनाथ क्षेत्र के 16 किमी. ऊपर किसी ताल की जानकारी नहीं है.

झील का दीदार कर लौट पर्यटकों की जुबानी

पैंयाताल का सफर कर वापस लौटे संदीप कोहली और तनुज रावत के मुताबिक वो कुछ दिन पहले केदारनाथ धाम गए थे. वहां से वो वासुकीताल पहुंचे. जहां वो गुफा में साधना कर रहे बाबा बलराम दास से मुलाकात की. संदीप कोहली और तनुज रावत के मुताबिक बाबा ने ही उन्हें पैंयाताल की जानकारी दी थी. जिसके बाद उन्होंने पैंयाताल की यात्रा शुरु की. संदीप और तनुज के मुताबिक उन्हें वासुकीताल से पैंयाताल का सफर पूरा करने में करीब 2 घंटे लगे

आने-जाने का कोई रास्ता नहीं

पैंया ताल तक पहुंचने का फिलहाल कोई विकसित रास्ता नहीं है. पहाड़ों की ऊंची-नीची ढलानों से होते हुए आप यहां तक पहुंच सकते हैं. लेकिन ये रास्ता जोखिम भरा है.

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