विंध्य की ऊंची-ऊंची पर्वतमालाओं, कंदराओं, दूर-दूर तक फैले घने जंगलों के बीच मनमोहक, शांत, प्राकृतिक सौंदर्य का पर्याय और कई आश्चर्यों को अपने आप में समेटे चित्रकूट धाम

चित्रकूट धाम आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का वो विहंगम स्थल है. जो सदियों के सांस्कृतिक विस्तार, इतिहास और पुरातन परंपराओं से रुबरू कराता है. नदियों की कल-कल, घने जंगल, पक्षियों की चहचहाहट, शांत, स्वच्छंद, मंदाकिनी की धारा यहां आने वालों को अभिभूत कर देती है.

रामायण काल के साक्ष्य आज भी मौजूद हैं

सदियों से सनातन संस्कृति की आस्था का केंद्र रहा चित्रकूट वहीं स्थान है. जहां भगवान राम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास के ग्यारह वर्ष बिताए थे. जिसके साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं.

गांवों का संगम है चित्रकूट

चित्रकूट कोई एक शहर नहीं, बल्कि गांवों का संगम है. कर्वी, सीतापुर, कामता, खोई, नया गांव के आस-पास के वन क्षेत्र को चित्रकूट कहा जाता है. दरअसल चित्रकूट चित्र और कूट दो शब्दों के मेल से बना है. संस्कृत में चित्र का मतलब अशोक और कूट का मतलब पर्वत या शिखर से है.

प्राचीन काल से ही चित्रकूट प्रेरणा का केंद्र रहा है. हजारों भिक्षुओं, साधु और संतों ने यहां आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया. चित्रकूट की अपनी एक अलग आध्यात्मिक सुगंध है. जो पूरे वातावरण में व्याप्त है. पर्यटक यहां के घने जंगलों, चहकते पक्षियों को देखकर रोमांचित होते हैं. तो तीर्थयात्री कामदगिरी की धूल में तल्लीन होकर अभिभूत होते हैं.

चित्रकूट का मुख्य तीर्थ स्थल है कामदगिरी

कामदगिरी चित्रकूट धाम का मुख्य तीर्थ स्थल है. कामदगिरी संस्कृत का शब्द है. जिसका अर्थ है. एक ऐसा पर्वत. जो सभी की इच्छाओं, कामनाओं को पूर्ण करता है. माना जाता है. कि वनवास के दौरान कामदगिरी पर्वत ही भगवान राम, सीता और लक्ष्मण का निवास स्थान था.

शहर से 50 किमी. दूर स्थित है धारकुंडी कुंड

चित्रकूट से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित धारकुंडी का वैभव देखते ही बनता है. पर्वत की कंदराओं में स्थित साधना स्थल, दुर्भल शैल चित्र, पहाड़ों पर बहती जल धाराओं और चारों ओर घने जंगलों ने पर्यटन और आध्यात्म को एक सूत्र में पिरो दिया है. माना जाता है कि महाभारत काल में युधिष्ठिर और दक्ष के बीच संवाद यहीं पर स्थित अघमर्षण कुंड में हुआ था. जो कि भूतल से करीब 100 मीटर नीचे है.

चित्रकूट धाम में अनेक तीर्थ स्थल हैं

कामदगिरी, कलिंजर, सीतापुर, भरतकूप, गणेशबाग, गुप्त गोदावरी, सती अनुसूया आश्रम, राजापुर. ये वो स्थान है. जिनके दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. राजापुर तो रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्म स्थली रही है.

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