हिमाचल.प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वो जगह जो कुदरत की बेइंतहा खूबसूरती अपने आप में समेटे हुए है. इन्हीं वादियों में स्थित है, लाहौल स्पीति का कुंजुम ला और कुंजुम माता मंदिर जिसको लेकर कई मान्यताएं हैं.

मां की शिला पर सिक्का चिपकाते हैं भक्त

मनाली से स्पीती वैली तक के सफ़र में रोहतांग दर्रे के बाद इस घाटी का सबसे ऊंचा दर्रा कुंजुंम ला है. जहां करीब 15 हजार फीट पर खुले में माता कुंजुम का मंदिर और शिला है. कहा जाता है, मां की शिला में अगर आपकी आस्था का सिक्का चिपका तो समझो हर मनोकामना पूरी. लेकिन यहां तक पहुंचना किसी खतरे से कम नहीं. यहां तक पहुंचने का सफर खतरों और चुनौतियों से भरा है.

चुनौतियों भरा है सफर

सफर की शुरुआत में ही हमें इस बात का अंदाजा लगना शुरु हो गया था कि आगे सफर कितना मुश्किल और खतरों भरा रहने वाला है. संकरी और कच्ची सड़क. जरा सी सावधानी हटी तो समझो जान गई.

कुंजुंला का सफर चुनौतियों भरा जरूर है, लेकिन आस-पास के नजारो सुकून देते हैं. यहां की सुंदरता का शब्दों में बखान नहीं किया जा सकता. सुंदर वादियां, नीला आसमान..और उसके नीचे अपने भेड़ें चराते गद्दी समुदाय के लोग.

रोमांच से भरा सफर में आपके रौंगटे खड़े कर देगा. एक ओर दुर्गम पहाड़ और छोटी- छोटी नदियां तो दूसरी ओर सफर पर उत्साह के साथ आगे बढ़ते भक्तों का काफिला शानदार अनुभव का एहसास कराते हैं

एडवेंचर्स लवर्स की पंसदीदा जगह है कुंजुंम ला

वैली की अनटच ब्यूटी , एडवेंचर स्पोर्ट्स और ट्रेवलर्स को अपनी ओर आकर्षित करती है. यहां स्थित चाचा-चाची का ढाबा पर्यटकों के बीच खास चर्चा का विषय है. ढाबा चलाने वाले दोरजे बोध और उनकी पत्नी हिशे बोध के बारे में कहा जाता है, उन्होंने कई पर्यटकों की जान बचाई है. इसके लिए उन्हें कई अवॉर्ड भी मिले हैं.

बर्फीले पहाड़ों के बीच स्थित है माता का मंदिर

मंदिर का तक सफर कई घंटों का है. लेकिन यहां पहुंचने पर लगता है, कि जैसे आप एक नई दुनिया में हैं. साफ हवा और सिर को छूता आसमान सारी थकान हवा कर देता है.

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