शीतकाल के लिए विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद हो गए. शीतकाल में गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना होगी

रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित धार्मिक स्थल है, जो पंचकेदारों में से एक है.रुद्रनाथ मंदिर अकेला ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है. यहां पूजे जाने वाले शिव जी के मुख को ‘नीलकंठ महादेव’ कहते हैं।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है धाम

11 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान रुद्रनाथ के धाम के चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा हुआ है…भगवान रुद्रनाथ के दर्शन के लिए भक्तों को लंबी यात्रा करनी पड़ती है. गोपेश्वर से 5 किमी. आगे सागर तक गाड़ी से पहुंचा जा सकता है. इसके बाद 22 किमी. की खड़ी चढ़ाई पैदल पूरी करनी पड़ती है…ये सफर, पहाड़ियों पर टेढ़े मेढ़े रास्तों से होकर गुजरता है.

22 किमी. लंबी चढ़ाई

रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा गोपेश्वर से शुरू होती है. गोपेश्वर से फिर सागर गांव तक गाड़ी के जरिए पहुंचा जा सकता है. सागर पहुंचने के बाद आगे का सफर पैदल पूरा करना पड़ता है. सागर गांव से आगे का रास्ता बेहद कठिन है. क्योंकि यहां शुरु होती है खड़ी चढ़ाई. सागर गांव से रुद्रनाथ धाम की दूरी करीब 22 किमी. है. लेकिन ये रास्ता बेहद खूबसूरत है. रुद्रनाथ धाम को जाने वाले रास्ते में कई सुंदर बुग्याल और मंदिर स्थित हैं.

कैसे पहुंचें ?

देश के किसी भी मार्ग द्वारा चाहे वो रेल मार्ग हो या हवाई मार्ग या सड़क मार्ग, सबसे पहले आपको ऋषिकेश पहुंचना होगा. ऋषिकेश से आपको चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर का रुख करना होगा जो ऋषिकेश से करीब 212 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ऋषिकेश से गोपेश्वर पहुंचने के लिए आपको बस या टैक्सी आसानी से उपलब्ध हो जाती है. गोपेश्वर से आप यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं.

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