कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए हुए लॉकडाउन में जिंदगी थम सी गई थी. लोगों को अपने घरों में रुकना पड़ा. अब धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर लौट रही है. ऐसे में बहुत से लोग कहीं जाने और घूमने का प्लान बना रहे हैं. अगर आप भी कहीं जाना चाहते हैं, तो हिमालय की गोद में बसी फूलों की घाटी उन जगहों में से एक हो सकती है.

कैसे पहुंचे ?

फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में है, और विश्व धरोहरों में से एक है. 1982 में करीब 87.50 वर्ग किमी फैली फूलों की घाटी को यूनेस्कों ने विश्व धरोहर घोषित किया था. यहां पहुंचने के लिए आपको देहरादून या फिर ऋषिकेश से बस पकड़नी होगी.

फूलों की करीब 500 प्रजातियां हैं

बर्फ से ढकी चोटियों के बीच दूर तक फैली फूलों की घाटी की खूबसूरती देखते ही बनती है. यहां 500 से ज्यादा फूलों की प्रजातियां पाई जाती हैं. प्रकृति से प्रेम करने वाले लोगों के लिए ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं.

प्रचलित लोककथाएं

फूलों की घाटी की लेकर स्थानीय लोगों की अपनी मान्यताएं हैं. लोगों का मानना है, कि फूलों की घाटी में परियां निवास करती हैं.

1931 में हुई थी खोज

सन 1931 में पर्वतारोही फ्रैंक स्मिथ और उनके साथी होल्डसवर्थ ने फूलों की घाटी की खोज की थी. जिसके बाद पूरी दुनिया की नज़र फूलों की घाटी पर पड़ी. तब से लेकर अब तक न जाने कितने ही पर्यटक फूलों की घाटी के दीदार कर चुके हैं.

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