भारत तो ऋषियों और मुनियों का देश रहा है. देश के इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो ना जाने कितने ऐसे नाम मिलेंगे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता को विस्तार दिया. जिन्होंने आस्था और आध्यात्म के आसरे भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर स्थापित किया है.
लेकिन जरा सोचिए. क्या आप किसी ऐसे शख्स को जानते हैं. जो भारत आया तो था. किसी और खोज में. लेकिन यहां हुई एक मुलाकात ने उसकी जिंदगी बदल दी. नाम बदल गया. पहचान बदल गई.
दरअसल सनातन संस्कृति ने उसके दिल-ओ-दिमाग को ऐसा छुआ, कि अमेरिका का वो मनोचिकित्सक आस्था और आध्यात्म के पथ पर चलते हुए अपनी पूरी जिंदगी विश्व भर में हिंदू धर्म का संदेश देता रहा.
2019 में बाबा रामदास का निधन हो गया
नाम है रिचर्ड अल्पर्ट, जिन्हें पूरी दुनिया बाबा रामदास के नाम से जानती है. जो अब हमारे बीच नहीं हैं, 22 दिसंबर 2019 को बाबा रामदास का निधन हो गया. लेकिन बहुत कम ही लोग जानते हैं. कि बाबा रामदास का जन्म 1931 में अमेरिका के बोस्टन में एक यहूदी परिवार में हुआ था. भारत आने और आध्यत्म से जुड़ाव से पहले वो हावर्ड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर थे.
हॉवर्ड विश्वविद्यालय से इस्तीफा देना पड़ा था
कहा जाता है, 1955 में रिचर्ड अल्पर्ट को नशे की लत लग गई थी. वो गांजा पीने लगे थे. और यहीं से उन्हें एलएसडी ड्रग्स का प्रयोग इलाज के लिए करने का ख्याल आया. उन्होंने प्रयोग शुरु किया. लेकिन हॉवर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन को उनका ये तरीका कुछ खास पसंद नहीं आया. जिसके बाद उन्होंने 1963 में हावर्ड विश्वविद्यालय से इस्तीफा दे दिया. लेकिन खोज बंद नहीं की, कहा जाता है, 1967 में जब रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए थे. तो उनका मकसद इसी खोज को आगे ले जाना था. उन्हें क्या पता था. उनकी ये भारत यात्रा उनकी जिंदगी बदलने वाली है और हुआ भी यही.
भारत यात्रा पर बदल गई जिंदगी
बताया जाता है, कि 1967 में जब रिचर्ड अल्पर्ट भारत यात्रा पर थे, तो उनकी मुलाकात भगवान दास नाम के शख्स हुई. जिन्होंने उन्हें नीब करौरी बाबा के बारे में बताया था. उनके चमत्कारों के बारे में जानकारी दी थी. भगवान दास की इन्हीं बातों ने रिचर्ड अल्पर्ट के दिल-ओ-दिमाग में जिज्ञासाओं का बवंडर ला दिया था. जो उन्हें नीम करौरी बाबा के पास तक खींच ले गया.
रिचर्ड अल्पर्ट के दिमाग में कई सवाल थे. जिनके जवाब वो नीब करौरी बाबा से जानना चाहते थे. 1967 में रिचर्ड अल्पर्ट एक मनोचिकित्सक के तौर पर नीब करौरी बाबा से मिलने पहुंचे थे. उसी अंदाज में बात की. शुरुआत में उन्हें भी लगा था. कि हिंदुस्तान के छोटे शहर नैनीताल से दूर आश्रम में बैठा एक शख्स उनके सवालों का क्या जवाब देगा ?. नीब करौरी बाबा की कुछ बातों पर उन्हें गुस्सा भी आया था. लेकिन इसके बाद नीब करौरी बाबा ने उनसे जो कुछ कहा. उस पर रिचर्ड अल्पर्ट की आंखे खुली की खुली रह गईं.
दरअसल ये बातें रिचर्ड अल्पर्ट की जिंदगी से जुड़ी थी. बाबा रामदास या फिर यूं कहें रिचर्ड अल्पर्ट ने अपनी आत्मकथा में लिखा है. नीब करौरी बाबा ने पहली मुलाकात में बता दिया था कि रात में आसमान में दिखने वाले तारों के बीच वो अपनी मां को खोजते थे. नीब करौरी बाबा की इस एक बात ने उन्हें रिचर्ड अल्पर्ट के बाबा रामदास बनने और आस्था और आध्यात्म की राह पर चलने का रास्ता प्रशस्त कर दिया था.
मां से बहुत प्यार करते थे बाबा रामदास
दरअसल रिचर्ड अल्पर्ट अपनी मां से बहुत प्यार करते थे. अपनी मां के देहान्त पर रिचर्ड अकेला महसूस करने लगे थे. बेचैन रहने लगे थे. रात के अंधेरे में आसमां में टिमटिमाते तारों को घंटों निहारते रहते थे. तारों के झुरमुट के बीच अपनी मां को तलाशते रहते. और यही बात उन्हें नीब करौरी बाबा ने बताई थी. जिसे सुन रिचर्ड अल्पर्ट सन्न रह गए थे. सोचने पर मजबूर हो गए थे. आखिर ये बात नीब करौरी बाबा को कैसे पता. जबकि उन्होंने इसका जिक्र तक नहीं किया था.
ऐसी कई बातें थी. जो नीब करौरी बाबा ने उस एक मुलाकात में रिचर्ड अल्पर्ट को बताई थीं. इसके बाद तो रिचर्ड अल्पर्ट ने नीब करौरी बाबा को अपना गुरु बना लिया. अपना जीवन हिंदू धर्म और आध्यात्म को समर्पित कर दिया.
रिचर्ड अल्पर्ट ने बाबा नीब करौरी के साथ रहकर करीब डेढ़ साल तक दीक्षा ली. योग सीखा हिंदू धर्म अपनाने के साथ ही हिंदू धर्मशास्त्रों का अध्ययन किया. यही वो वक्त जब बाबा नीब करौरी ने उनका नाम बदलकर रामदास रख दिया. मतलब भगवान राम का दास.
करीब डेढ़ साल की दीक्षा लेने के बाद बाबा रामदास अमेरिका लौट गए. जहां उन्होंने हनुमान फाउंडेशन की स्थापना की. जिसके तहत प्रिजन प्रोजेक्ट पर काम शुरु हुआ. जेल के कैदियों को आध्यात्म से जोड़ने का काम…
बाबा रामदास ने कुल 15 किताबें लिखी
बाबा रामदास हिंदू धर्म के मूल्यों को न सिर्फ सात समंदर पार तक ले गए. दूसरे धर्म के लोगों को हिंदू धर्म के करीब लाने का काम किया.
बाबा रामदास ने कुल 15 किताबें लिखी. इनमें से कई पुस्तकें खासी चर्चित हुईं. बाबा रामदास की लिखी मिरेकल ऑफ लव पुस्तक काफी चर्चित रही. इस किताब में बाबा रामदास ने नीब करौरी बाबा से जुड़ी घटनाओं का जिक्र किया था. बाबा रामदास को अमेरिका में कई पुरुस्कार मिले. 1996 में अमेरिका में शुरु किया उनका रेडियो प्रोग्राम खासी चर्चा में रहा था.रेडियो टॉक शो हेयर एंड नाउ विद रामदास काफी चर्चित था. हालांकि 1997 में बाबा रामदास को लकवा की बीमारी ने घेर लिया. जिसके बाद उनका चलना फिरना बंद हो गया था. बावजूद इसके बाबा रामदास अपनी आखिरी सांस तक बेबसाइट के जरिए हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार करते रहे.

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